छठ पर्व में किस दिन क्या होता है…
पहला दिन- नहाय खाय। जिसमें घर की सफाई, फिर स्नान और शाकाहारी भोजन से व्रत की शुरुआत होती है।
दूसरा दिन- व्रती दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे खरना कहा जाता है।
तीसरा दिन- छठ का प्रसाद बनाता है। प्रसाद में ठेकुआ, चावल के लड्डू और चढ़ावे के रूप में फल आदि होता है। शाम को बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और तालाब या नदी किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
चौथा दिन- कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उगते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। व्रतधारी दोबारा वहीं जाते हैं, जहां शाम को अर्घ्य दिया था।
छठ पर्व क्यों है खास…
- 4 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में ना पंडित होते हैं और ना मंत्र। इसमें डूबते और उगते दोनों सूर्य को प्रणाम किया जाता है।
- गरीब हो या अमीर, अगड़ा हो या पिछड़ा, यह पर्व हमें सबको बराबर का बना देता है। सब एक ही घाट और तलाब किनारे सटकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। तब ना कोई छोटा होता है ना बड़ा।
- प्रसाद बिना भेदभाव के सब एक-दूसरे का खाते और खिलाते हैं। प्रसाद में वो सब होता है, जिसका सीजन अभी है। जो सबको इजली मिल जाता है। जैसे- ठेकुआ, केला, सिंघाड़ा, नाशपाती, सेब, डाभ नींबू, शरीफा, शकरकंद, सुथनी, मूली, अदरक और हल्दी का हरा पौधा।
- आस्था ऐसी कि बिना बोले हर कोई जो मिला वही काम करता है। कोई सड़क पर झाड़ू लगा रहा है तो कोई घाट की सफाई। कोई रंगाई-पोताई।
छठ पर्व का इतिहास भी जान लीजिए…
स्कंद पुराण के मुताबिक, राजा प्रियव्रत (मनु के पुत्र) को कोई संतान नहीं था। उन्होंने महर्षि कश्यप से वरदान मांगा। ऋषि के यज्ञ से उन्हें एक बेटा हुआ, लेकिन उसमें जान नहीं थी। इससे दुखी राजा-रानी आत्महत्या की सोचने लगे। तभी एक देवी प्रकट हुईं।
उन्होंने कहा, ‘मैं उषा की ज्येष्ठा बहन षष्ठी देवी हूं, बच्चों की रक्षा मेरी जिम्मेदारी है। यदि तुम मेरी विधि से पूजा करोगे तो तुम्हें संतान सुख मिलेगा।’ राजा-रानी ने देवी की पूजा की और बेटे का जन्म हुआ। इसके बाद से इस पूजा की शुरुआत हो गई।
ऋग्वेद में लिखा गया है कि सूर्य और उसकी किरणों की आराधना से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। मोदी सरकार ने छठ को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने की पहल की है।

श्री जे. एन. चौकसे जी (चेयरमैन, एलएनसीटी समूह) का संदेश 🌸
(छठ पूजा के पावन अवसर पर)
छठ पूजा के इस पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह पर्व सूर्य देव और माता छठी मइया की उपासना का प्रतीक है — जो हमें कर्म, अनुशासन, और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का संदेश देता है।
यह समय है आभार व्यक्त करने का — उस प्रकाश के लिए जो हमें सही मार्ग दिखाता है,
और उस ऊर्जा के लिए जो हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
मैं प्रार्थना करता हूँ कि सूर्य देव आप सभी को उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दें।
आइए, हम सब मिलकर शुद्ध विचारों और सकारात्मक ऊर्जा के साथ अपने जीवन और समाज को और बेहतर बनाएं।
छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

