
‘छात्र राष्ट्र का वर्तमान हैं, केवल भविष्य नहीं,
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से सशक्त भारत की ओर’
— जे. एन. चौकसे
संस्थापक एवं अध्यक्ष, एलएनसीटी ग्रुप का दिल्ली से प्रकाशित अंग्रेजी के अख़बार में श्री जयनारायण चौकसे जी का वरिष्ठ पत्रकार श्री डॉक्टर अनिल सिंह द्वारा लिए गए इंटरव्यू का हिंदी संस्करण –
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला होती है। यह केवल डिग्री या रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि चरित्र, विवेक और सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्माण की प्रक्रिया है। भारत जैसी प्राचीन और समृद्ध सभ्यता में शिक्षा का उद्देश्य सदैव समग्र विकास रहा है।
अक्सर कहा जाता है कि छात्र राष्ट्र का भविष्य हैं, किंतु वास्तविकता यह है कि छात्र राष्ट्र का वर्तमान हैं। वे आज की अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए आज की शिक्षा की गुणवत्ता ही आने वाले भारत की दिशा तय करती है।
गुणवत्ता-आधारित शिक्षा की आवश्यकता
वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में शिक्षा प्रणाली का गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक और नवाचार-उन्मुख होना अनिवार्य है। पाठ्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं, आधुनिक तकनीक और शोध से जोड़ना समय की मांग है।
शिक्षकों की भूमिका केवल अध्यापन तक सीमित न होकर मार्गदर्शन, मेंटरशिप और प्रेरणा देने की होनी चाहिए।
शिक्षा में सुधार और नवाचार
आधुनिक शिक्षा का फोकस केवल अंकों पर नहीं, बल्कि कौशल, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और समस्या-समाधान पर होना चाहिए।
संस्थानों को चाहिए कि वे:
अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दें
कौशल विकास और स्टार्ट-अप संस्कृति को प्रोत्साहित करें
डिजिटल साक्षरता और व्यावहारिक प्रशिक्षण को प्राथमिकता दें
भारत की सभ्यतागत सोच और शिक्षा
भारत की पहचान उसकी सभ्यतागत मूल्यों से है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना हमारी शिक्षा प्रणाली में भी प्रतिबिंबित होनी चाहिए। तकनीक-आधारित शिक्षा के साथ-साथ मानवीय संवेदनाएँ, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास भी उतना ही आवश्यक है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के इस युग में भी मानव विवेक, संवेदनशीलता और रचनात्मकता का कोई विकल्प नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य संतुलित और जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण होना चाहिए।
छात्र : परिवर्तन के वाहक
जब छात्रों को सही वातावरण, संसाधन और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे समाज और राष्ट्र दोनों के लिए सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनते हैं। युवा शक्ति ही भारत की सबसे बड़ी पूँजी है।
निष्कर्ष
छात्र राष्ट्र की वर्तमान शक्ति हैं। यदि आज उनकी शिक्षा, सोच और चरित्र को सही दिशा दी जाए, तो भारत न केवल आर्थिक रूप से बल्कि नैतिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक रूप से भी विश्व में नेतृत्व करेगा।
शिक्षा में निवेश वास्तव में राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य—दोनों में निवेश है।
