
डॉक्टरों के लिए “AI in Medicine” कोर्स से बदलेगा चिकित्सा प्रशिक्षण का भविष्य
मेडिकल शिक्षा अब पारंपरिक पुस्तकों और क्लासरूम तक सीमित नहीं रही है। बदलते समय और तकनीकी प्रगति को देखते हुए भारत में मेडिकल शिक्षा को डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जोड़ा जा रहा है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज़ (NBEMS) ने डॉक्टरों के लिए “AI in Medicine” नाम से एक नया ऑनलाइन कोर्स शुरू किया है।
क्या है “AI in Medicine” कोर्स?
यह कोर्स विशेष रूप से
- MBBS डॉक्टरों
- पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों
- मेडिकल फैकल्टी
- और प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों
को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों को यह समझाना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार आधुनिक चिकित्सा का अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है।
कोर्स में क्या सिखाया जाएगा?
इस कोर्स के अंतर्गत डॉक्टरों को निम्नलिखित विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है:
- AI आधारित रोग निदान (Diagnosis)
– रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और इमेज एनालिसिस में AI की भूमिका - डेटा-आधारित उपचार योजना (Treatment Planning)
– मरीज की रिपोर्ट, मेडिकल हिस्ट्री और डेटा एनालिटिक्स के आधार पर निर्णय - क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम
– AI कैसे डॉक्टर की सहायता करता है, न कि उसकी जगह लेता है - मेडिकल शिक्षा में AI का उपयोग
– स्मार्ट लर्निंग, सिमुलेशन, वर्चुअल केस स्टडी और डिजिटल असेसमेंट - नैतिकता और सीमाएं (Ethics & Limitations)
– AI के सुरक्षित, जिम्मेदार और मानवीय उपयोग पर विशेष जोर
क्यों जरूरी है AI का प्रशिक्षण?
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में:
- मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल होंगे
- डायग्नोसिस में AI टूल्स सामान्य होंगे
- टेलीमेडिसिन और स्मार्ट हॉस्पिटल्स का विस्तार होगा
ऐसे में डॉक्टरों का तकनीकी रूप से सक्षम होना अत्यंत आवश्यक है।
NBEMS का यह कोर्स डॉक्टरों को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
मेडिकल शिक्षा प्रणाली पर असर
इस पहल से:
डॉक्टरों की डिजिटल दक्षता बढ़ेगी
चिकित्सा सेवाएं अधिक सटीक और तेज़ होंगी
मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा
भारत वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी-आधारित हेल्थकेयर में मजबूत भूमिका निभा सकेगा
सारांश
“AI in Medicine” कोर्स यह संकेत देता है कि भारत की मेडिकल शिक्षा अब भविष्य-उन्मुख, शोध-आधारित और तकनीक-सक्षम बन रही है।
AI को डॉक्टर का विकल्प नहीं, बल्कि एक सशक्त सहायक के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और प्रभावी उपचार मिल सके
